1. व्यष्टि अर्थशास्त्र ​- एक परिचय - EXPLORING-E-ECONOMICS

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1.व्यष्टि अर्थशास्त्र ​- एक परिचय

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आर्थिक समस्या क्या है ? WATCH VIDEO 🔼 अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण बिन्दु (What is Microeconomics Key Points-HOTS)
  • अर्थशास्त्र (Economics) शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों OIKOS(घरेलू) तथा NEMEIN(प्रबंध) से बना है।
  • एडम स्मिथ को अर्थशास्त्र का पितामह (Father of Economics) माना जाता है।
  • विश्व आर्थिक मंदी वर्ष 1929-30 में आई थी।
  • नॉर्वे के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री तथा अर्थशास्त्र के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रैगनर फ़्रिश ने 1933 में अर्थशास्त्र को दो भागों में बांटा है-व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र ।
  • अर्थशास्त्र की प्रकृति कला और विज्ञान दोनों हैं।
  • विज्ञान के रूप में अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान है और वास्तविक और आदर्शात्मक विज्ञान दोनों हैं।

🔰बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. किसी अर्थव्यवस्था में चयन की समस्या का कारण है ?(a) संसाधनों की अधिकता(b) प्रति व्यक्ति आय(c) प्रौद्योगिकीय प्रगति(d) संसाधनों की कमी2. अर्थशास्त्र के जनक कौन थे-(a) जे०बी० से (b) माल्थस (c) एडम स्मिथ (d) रिकार्डो।3. किसने कहा है कि 'अर्थशास्त्र चयन का तर्कशास्त्र है'-(a) कीन्स(b) हिक्स(c) रोबिन्स(d) मार्शल।4. निम्न में से कौन-सी आर्थिक क्रियाएँ अर्थशास्त्र की अध्ययन सामग्री के अन्तर्गत सम्मिलित की जाती हैं-(a) असीमित आवश्यकताओं से जुड़ी आर्थिक क्रियाएँ(b) सीमित साधनों से जुड़ी आर्थिक क्रियाएँ(c) 'a' व 'b' दोनों(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।5. किसने कहा है कि अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है-(a) माल्थस (b) एडम स्मिथ (c) मार्शल(d) रिकार्डों6. व्यष्टि अर्थशास्त्र में सम्मिलित होती हैं-(a) व्यक्तिगत इकाई(b) छोटे-छोटे चर(c) व्यक्तिगत मूल्य निर्धारण(d) ये सभी।7. व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत निम्न में से किसका अध्ययन किया जाता है-(a) व्यक्तिगत इकाई(b) आर्थिक समग्र(c) राष्ट्रीय आय(d) इनमें से कोई नहीं।8. किस अर्थव्यवस्था में कीमत यन्त्र के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं-(a) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था(b) समाजवादी अर्थव्यवस्था(c) मिश्रित अर्थव्यवस्था(d) इनमें से कोई नहीं।9. एक समाजवादी अर्थव्यवस्था का मूल उद्देश्य होता है-(a) अधिकाधिक उत्पादन(b) अधिकाधिक लाभ(c) अधिकतम सामाजिक कल्याण(d) आर्थिक स्वतन्त्रता ।10. निम्न में से किस अर्थव्यवस्था में निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र का सह-अस्तित्व होता है-(a) पूँजीवादी(b) मिश्रित(c) साम्यवादी(d) समाजवादी।11.किसी वस्तु की मानवीय आवश्यकता को सन्तुष्ट करने की क्षमता को कहते है।(a) रूचि(b) उपभोग(c) उपयोगिता(d) उत्पादन

🔰अभिकथन-कारण आधारित प्रश्नोत्तर

निर्देश (प्र०सं० 1- 4): निम्नलिखित प्रश्नों में दो कथनों को अभिकथन (A) तथा कारण (R) के रूप में चिह्नित किया गया है। निम्नलिखित विकल्पों(a), (b), (c) तथा (d) में से चुनकर इनका सही उत्तर दीजिए।(a) A तथा R दोनों सही हैं तथा R, A की सही व्याख्या करता है(b) A तथा R दोनों सही हैं परन्तु R, A की सही व्याख्या नहीं करता है(c) A सही है परन्तु R गलत है(d) A तथा R दोनों गलत हैं।प्रश्न 1. अभिकथन (A) : संसाधन केवल दुर्लभ ही नहीं होते बल्कि इनके वैकल्पिक प्रयोग भी होते हैं।कारण (R) : संसाधनों की दुर्लभता तथा इनके वैकल्पिक प्रयोग के कारण आर्थिक समस्या उत्पन्न होती है।​उत्तर- (a)प्रश्न 2. अभिकथन (A) : बाजार अर्थव्यवस्था में उत्पत्ति के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है।कारण (R) : बाजार अर्थव्यवस्था में उपभोग, उत्पादन एवं व्यवसाय के चयन में पूर्ण स्वतन्त्रता नहीं होती है।उत्तर- (c)प्रश्न 3.​ अभिकथन (A): मनुष्य की आवश्यकताएँ उपलब्ध साधनों की तुलना में कहीं अधिक होती हैं।कारण (R) : संसाधनों की दुर्लभता जीवन का एक ऐसा सत्य है, जिसने अर्थशास्त्र को जन्म दिया है।उत्तर- (b)प्रश्न 4. अभिकथन (A) : अर्थव्यवस्था से आशय एक क्षेत्र की उन सभी उत्पादन इकाइयों के समूह से है जिनसे लोग आजीविका कमाते हैं।कारण (R) : अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जो लोगों को जीविका प्रदान करती है।उत्तर- (a)

🔰निशिचत तथा अति लधु प्रश्नोत्तर

1. अर्थशास्त्र किसे कहते है ?" ​अर्थशास्त्र सीमित साधनों, असीमित आवश्यकताओं, वैकल्पिक प्रयोगों तथा विशेष प्रयोग के चुनाव का अध्ययन करता है।"2. व्यष्टि अर्थशास्त्र किसे कहते है ?व्यष्टि अर्थशास्त्र छोटे स्तर पर आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन करता है जिसमें एक उपभोक्ता, एक उत्पादक, एक फर्म अथवा एक उद्योग का अध्ययन किया जाता है।3. आर्थिक क्रिया किसे कहते है ?"उस क्रिया को आर्थिक क्रिया कहते हैं जिसका सम्बन्ध मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट करने के लिए सीमित साधनों के उपयोग से होता है।"4. आर्थिक समस्याओं का क्या अर्थ है ? असीमित आवश्यकताओं,सीमित साधनों एवं उनके वैकल्पिक प्रयोग के कारण उत्पन्न चयन की समय ही आर्थिक समस्या है।5. अर्थशास्त्र का जनक कौन है ? एडम स्मिथ6. सीमितता का क्या अर्थ है ? सीमितता का अर्थ है साधनों की कुल पूर्ति उनकी कुल माँग से कम है।7. चयन की समस्या क्या है ? मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित है और उनको पुरे करने वाले साधन सीमित मात्रा में उपलब्ध है जिनका वैकल्पिक प्र्रयोग सम्भव है। इन साधनों से किस आवश्यकता को पहले सन्तुष्टि किया जाए और किसे बाद में, यही चयन की समस्या है।8. वास्तविक अर्थशास्त्र किसे कहते है ? जो किसी तथ्य के कारण तथा परिणाम दोनों का अध्ययन करता है उसे वास्तविक अर्थशास्त्र कहते है।9. अवसर लागत किसे है ? एक वस्तु की कुछ अधिक मात्रा प्राप्त करने के बदले दूसरी वस्तु की कुछ मात्रा को छोड़ना पड़ता है। इस एक अतिरिक्त इकाई को प्राप्त करने को ही अवसर लागत कहते है।10. उत्पादन सम्भावना वक्र क्या है ? उत्पादन सम्भावना वक्र दो वस्तुओं के सभी संयोगों को बताता है जिससे सन्तुष्टि प्राप्त होती है।11. भारत में किस प्रकार की अर्थव्यवस्था पाई जाती है ? मिश्रित अर्थव्यवस्था12. संसाधनों से क्या अभिप्राय है ? संसाधनों उन वस्तुओं तथा सेवाओं से है जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन करने में होता है। जैसे भूमि, श्रम, पूँजी, मशीनें आदि।13. मध्यवर्ती वस्तुएँ किन्हें कहते है ? वे वस्तुएँ जिनका उपयोग किन्हीं अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए किया जाता है उसे मध्यवर्ती वस्तुएँ कहते है। ​​14. अर्थव्यवस्था की तीन केन्द्रीय समस्याएँ क्या है ? 1. किन वस्तुओं का उत्पादन किया जाए और कितनी मात्रा में 2. उत्पादन कैसे किया जाए। 3. उत्पादन किसके लिए किया जाए।15. बाजार अर्थव्यवस्था से क्या अभिप्राय है ?बाजार अर्थव्यवस्था में सभी आर्थिक क्रियाकलापों का निर्धारण बाजार की स्थितियों के अनुसार होता है। बाजार में वस्तुओं की कीमत का निर्धारण माँग और पूर्ति की सापेक्षिक के द्वारा निधारित होता है। 16. अर्थव्यवस्था क्या है ?अर्थव्यवस्था से अभिप्राय किसी क्षेत्र विशेष में होने वाली समस्त आर्थिक क्रियाओं उत्पादन उपभोग विनिमय निवेश इत्यादि के सामूहिक स्वरूप ढांचे से है या क्षेत्र विशेष एक लघु क्षेत्र जिला राज्य देश या समस्त विश्व हो सकता है|17. सकारात्मक अर्थशास्त्र क्या है ? सकारात्मक अर्थशास्त्र है जो तथ्यों का उसी रूप में अध्ययन करता है जिसमें वह पाए जाते हैं यहां इस प्रकार का निर्णय या सुझाव नहीं देता कि क्या सही है और क्या गलत है यहां कारण और परिणाम के संबंध का विश्लेषण करता है जैसे भारत में बेरोजगारी की समस्या है|18. आदर्शत्मक अर्थशास्त्र क्या है ?आदर्शत्मक वह विज्ञान है जो आर्थिक घटनाओं का परीक्षण करता है कि क्या सही है और क्या गलत और इस आधार पर सुझाव देता है कि क्या होना चाहिए जैसे सरकार को बेरोजगारी की समस्या दूर करना चाहिए|19.परम्परागत रूप से अर्थशास्त्र की विषय वस्तु का अध्ययन किन दो व्यापक शाखाओ के अन्तर्गत किया जाता है ?व्यष्टि एवं समष्टि अर्थशास्त्र में। 🔰विस्तृत ​ प्रश्नोत्तर नोट्स 1.अर्थशास्त्र क्या है ? उसकी विभिन्न प्रकार की परिभाषा दीजिऐ ?अर्थशास्त्र का अर्थ और परिभाषा-अर्थशास्त्र 2 शब्दों से मिल कर बना है- अर्थ=धन और शास्त्र=वैज्ञानिक अध्ययन । अर्थात अर्थशास्त्र वह शास्त्र है, जिसमें मनुष्य की धन संबंधी क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। अंग्रेजी भाषा में अर्थशास्त्र को ECONOMICS कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा का यह शब्द ग्रीक भाषा के 2 शब्दों यानी OIKOS(घरेलू) तथा NEMEIN(प्रबंध) से लिया गया है। इसका अर्थ होता है गृह प्रबंध।प्रत्येक गृहस्थ की आवश्यकताएं असीमित होती है, परंतु उन्हें संतुष्ट करने वाले अधिकतर साधन जैसे-कपड़ा,भोजन, आय आदि सीमित होते हैं । इन्हीं सीमित साधनों को धन कहा जाता है । प्रत्येक गृहस्थ अपने धन का उचित उपयोग इस तरह से करता है जिससे वह अपनी अधिक से अधिक आवश्यकताओं को संतुष्ट कर सके। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उसे अर्थशास्त्र के अध्ययन की आवश्यकता होगी।अर्थशास्त्र की परिभाषाअर्थशास्त्र एक विकासशील शास्त्र है। समय-समय पर विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने इसकी अलग-अलग परिभाषाएं दी है। अर्थशास्त्र की परिभाषाओं को हम निम्नलिखित भागों में बांट सकते हैं-1-धन संबंधी परिभाषा (Wealth definition of Economics)आधुनिक अर्थशास्त्र के पिता एडम स्मिथ ने 1776 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘An enquiry into the nature and causes of wealth of nation’ में अर्थशास्त्र की निम्न परिभाषा दी है-“अर्थशास्त्र राष्ट्रों के धन की प्रकृति तथा कारणों की खोज है।”2-भौतिक कल्याण संबंधी परिभाषा (Material Welfare definition of Economics)डॉ मार्शल ने 1890 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘Principle of Economics’ में अर्थशास्त्र के निम्न परिभाषा दी है-“अर्थशास्त्र जीवन के साधारण व्यवसाय के संबंध में मानव जाति का अध्ययन है। यह व्यक्तिगत तथा सामाजिक कार्यों के उस भाग का अध्ययन करता है, जिसका घनिष्ठ संबंध कल्याण प्रदान करने वाले भौतिक पदार्थों की प्राप्ति तथा उनका उपयोग करने से है।”3-दुर्लभता संबंधी परिभाषा (Scarcity definition of Economics)रॉबिंस ने 1932 में प्रकाशित अपनी पुस्तक “AN ESSAY ON THE NATURE AND SIGNIGICANCE OF ECONOMICS SCIENCE” में अर्थशास्त्र की दुर्लभता संबंधी परिभाषा दी है। रॉबिन्स के अनुसार-“अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो विभिन्न उपयोगों वाले सीमित साधनों तथा उद्देश्य से संबंध रखने वाले मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है।”4-विकास केंद्रित परिभाषा (Growth Oriented definition of Economics)आधुनिक अर्थशास्त्री जैसे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री प्रोफेसर सेमुअलसन, पीटरसन, फर्गुसन आदि के अनुसार – “अर्थशास्त्र वह शास्त्र है जिसमें मनुष्य के उन कार्यों का अध्ययन किया जाता है जो वे अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने के लिए सीमित साधनों के उचित प्रयोग के संबंध में करते हैं।“2. अर्थशास्त्र के कौन से दो भाग है ?अर्थशास्त्र के दो भाग व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र हैनॉर्वे के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री तथा अर्थशास्त्र के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता रैगनर फ़्रिश ने 1933 में अर्थशास्त्र को दो भागों में बांटा है-व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र ।A-व्यष्टि अर्थशास्त्र (MICRO ECONOMICS) अंग्रेजी भाषा में व्यष्टि को MICRO कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा का यह शब्द ग्रीक भाषा के शब्द (MIKROS) से लिया गया है, जिसका अर्थ है-छोटा।व्यष्टि अर्थशास्त्र में केवल एक आर्थिक इकाई की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। जैसे एक गृहस्थ की आय का अध्ययन या एक फर्म के उत्पादन का अध्ययन। प्रोफ़ेसर बोर्डिंग के अनुसार-“व्यष्टि अर्थशास्त्र में केवल फर्म, एक गृहस्थ, व्यक्तिगत कीमत, मजदूरी, आय, उद्योग तथा वस्तुओं का अध्ययन किया जाता है।“B-समष्टि अर्थशास्त्र (MACRO ECONOMICS)अंग्रेजी भाषा में समष्टि को MACRO कहा जाता है। अंग्रेजी भाषा का यह शब्द ग्रीक भाषा के शब्द (MAKROS) से लिया गया है। जिसका अर्थ है-बड़ासमष्टि अर्थशास्त्र में संपूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक क्रियाओं तथा आर्थिक समस्याओं का अध्ययन किया जाता है । राष्ट्रीय आय और रोजगार और कीमत स्तर यह विषय समष्टि अर्थशास्त्र के मूल अंग है।3. व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन का महत्व ?व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन के निम्न लाभ है1-अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली– व्यष्टि अर्थशास्त्र द्वारा एक अर्थव्यवस्था की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इसे हमें ज्ञात होता है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न अंग जैसे उपभोक्ता, फर्म आदि कुशलतापूर्वक कार्य कर रहे हैं अथवा नहीं। प्रो. वाटसन के अनुसार,“व्यष्टि अर्थशास्त्र के कई उपयोग हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण उपयोगी है समझाने में है कि अर्थव्यवस्था किस प्रकार कार्य करती है।”2-भविष्यवाणी– व्यष्टि अर्थशास्त्र के अध्ययन करके हम आर्थिक भविष्यवाणी कर सकते हैं। क्योंकि यदि एक विशेष घटना घटी है तो उसके कुछ विशेष परिणाम निकलेंगे। उदाहरण के लिए यदि किसी वस्तु की मांग बढ़ती है तो उसकी कीमतों में बढ़ने की संभावना होती है।3-आर्थिक नीतियां– व्यष्टि अर्थशास्त्र का प्रयोग आर्थिक नीति बनाने में भी किया जाता है। कीमत नीति एक ऐसा उपकरण है जो इस कार्य में बहुत सहायक होती है। इसमें हम अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले सरकारी नीतियों का विश्लेषण कर सकते हैं।4-आर्थिक कल्याण– व्यष्टि अर्थशास्त्र द्वारा आर्थिक कल्याण के लिए आवश्यक विभिन्न शर्तों का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। व्यष्टि अर्थशास्त्र इस बात का सुझाव देता है कि आर्थिक कल्याण के आदर्श को कैसे प्राप्त किया जा सकता है।5-प्रबंध संबंधी निर्णय- व्यष्टि अर्थशास्त्र का प्रयोग प्रबंध-संबंधी निर्णय लेने में भी किया जाता है। उदाहरण के लिए लागतों तथा मांग का विश्लेषण करके फ़र्मे अपनी नीतियां निर्धारित करते हैं ।6-अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सहयोग– व्यष्टि अर्थशास्त्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार की समस्याओं जैसे व्यापार-शेष संतुलन, विदेशी विनिमय दर आदि को साझा किया जाता है।4. अर्थशास्त्र की प्रकृति कैसी है ?अर्थशास्त्र की प्रकृति को दो भागों में बांटा जा सकता है। एक विज्ञान के रूप में और दूसरा कला के रूप में।A-अर्थशास्त्र विज्ञान है प्रोफेसर सैलिगमैन के अनुसार विज्ञान दो प्रकार का हो सकता है- 1) सामाजिक विज्ञान, 2) प्राकृतिक विज्ञान। अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है, क्योंकि इसका संबंध मनुष्यों से है। जबकि भौतिकी, रसायन आदि प्राकृतिक विज्ञान है। अर्थशास्त्र को सामाजिक विज्ञान मानने के निम्न कारण है-1-क्रमागत अध्ययन एक सामाजिक विज्ञान के रूप में अर्थशास्त्र में मनुष्य के व्यवहार का क्रमागत अध्ययन किया जाता है।2-वैज्ञानिक नियम अर्थशास्त्र के नियम जैसे मांग का नियम पूर्ति का नियम आदि वैज्ञानिक नियम है। यह नियम विभिन्न चरों के कारण तथा परिणाम में संबंध स्थापित करते हैं उदाहरण- मांग के नियम से प्रकट होता है कि किसी वस्तु की कीमत बढ़ने से उसकी मांग कम हो जाएगी। इस तरह से अर्थशास्त्र के नियम, वैज्ञानिक नियमों की भांति लागू होते हैं ।3-नियमों की सत्यता प्रत्येक विज्ञान अपने नियमों की सत्यता की जांच करता है। अर्थशास्त्र में भी विभिन्न नियमों की सत्यता की जांच की जा सकती है।5. अर्थशास्त्र एक वास्तविक (POSITIVE), आदर्शात्मक (NORMATIVE) विज्ञानऔर कला के रूप में से कौन सा है ? वास्तविक विज्ञान के रूप में- वास्तविक विज्ञान वह विज्ञान है जिसमें किसी विषय की सही तथा वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जाता है। एक विज्ञान के रूप में अर्थशास्त्र के कथन वास्तविक कथन होते हैं। वास्तविक कथन वे कथन होते हैं जिन से ज्ञात होता है कि “क्या है? क्या था> तथा विशेष परिस्थितियों में क्या होगा ? उदाहरणतया- भारत के जनसंख्या 125 करोड़ है। भारत की विकास दर 7% है। यह वास्तविक विज्ञान कथन के उदाहरण है।आदर्शात्मक विज्ञान के रूप में- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जैसे मार्शल, पीगू आदि यह मानते थे कि अर्थशास्त्री आदर्शात्मक विज्ञान भी है। आदर्शात्मक विज्ञान वह विज्ञान है जिसमें क्या होना चाहिए का अध्ययन किया जाता है। उदाहरण के लिए भारत की जनसंख्या पर नियंत्रण होना चाहिए। भारत की विकास दर 10% से अधिक होनी चाहिए। कीमतों में स्थिरता पाए जानी चाहिए। आय का समान वितरण होना चाहिए। संक्षेप में अर्थशास्त्र एक वास्तविक विज्ञान भी है और आदर्शात्मक विज्ञान भी है।अर्थशास्त्र कला का कला के रूप में किसी निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए ज्ञान का व्यवहारिक प्रयोग कला कहलाता है। अर्थशास्त्र में विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अर्थशास्त्र के सिद्धांतों का व्यवहारिक रूप में प्रयोग किया जाता है। अतः अर्थशास्त्र को एक कला के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है। प्रो. जे. एम. केन्ज ने कला के स्थान पर व्यावहारिक अर्थशास्त्र शब्द का प्रयोग किया है। आधुनिक अर्थशास्त्री कला के लिए आर्थिक नीति शब्द का प्रयोग करते हैं ।अंत में हम कह सकते हैं कि अर्थशास्त्र विज्ञान तथा कला दोनों ही हैं। प्रोफेसर चेपमेन में ने ठीक ही कहा है कि “अर्थशास्त्र एक वास्तविक विज्ञान है जो आर्थिक तथ्यों की वास्तविक स्थिति से संबंधित है और एक कला है जो इस प्रकार के उपाय और साधन ढूंढता है जिनसे इच्छित लक्ष्य प्राप्त किए जा सकें।“6. अर्थशास्त्र की विषय सामग्री क्या है ?अर्थशास्त्र की विषय सामग्री को पांच भागों में बांटा गया है1.उपभोग - वस्तुओं और सेवाओं की उपयोगिता को नष्ट करना या कम करना ही उपभोग कहलाता है उपभोग के अंतर्गत आवश्यकताओं उनके लक्षण वर्गीकरण तथा संतुष्टि करने की विधि का अध्ययन किया जाता है2. उत्पादन - माननीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किसी वस्तु में उपयोगिता का सर्जन करना उत्पादन कहलाता है| उत्पादन के इस विभाग में उत्पत्ति तथा उत्पादन के साधन उनके लक्ष्य और कार्य क्षमता उत्पत्ति के नियम व उत्पत्ति की अन्य समस्याओं का अध्ययन किया जाता है|3. विनिमय - में विनिमय का अर्थ वस्तु की अदला बदली से है इस विभाग के अंतर्गत कीमत निर्धारण में बाजार के रूप मुद्रा बैंकिंग बीमा एवं व्यापार आदि पहलुओं का अध्ययन किया जाता है|4. वितरण - उत्पत्ति या उत्पादन के विभिन्न साधनों के सामूहिक सहयोग से जो उत्पादन/ आय सृजित होती है उसको विभिन्न साधनों में उनके प्रतिफल के रूप में बांटना ही वितरण का अध्ययन है इसमें लाभ लगान ब्याज मजदूरी और वेतन का अध्ययन किया जाता है|5. राजस्व - राजस्व के अंतर्गत सरकार की आय-व्यय बजट सार्वजनिक ऋण तथा वित्तीय प्रशासन आदि से संबंधित समस्याएं का अध्ययन किया जाता है|7.अर्थशास्त्र में उत्पादन के चार पहलू क्या हैं?​उत्पादन के चार महत्वपूर्ण पहलू हैं –
  1. भूमि: इसका तात्पर्य मिट्टी, पानी, हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों से है। एक फर्म इन सेवाओं को प्राप्त करने के लिए किराया देती है।
  2. श्रम: यह किसी कार्य को करने के लिए आवश्यक मानसिक और शारीरिक प्रयासों को दर्शाता है। एक संगठन उन लोगों को वेतन देता है जो अपना श्रम लगाते हैं जैसे कि कर्मचारी, प्रबंधक, इंजीनियर आदि।
  3. पूंजी: यह मौद्रिक, भौतिक और मूर्त निवेशों का संयोजन है जो उत्पादन को आगे बढ़ाने में मदद करता है। इन निवेशों के बदले में, व्यवसाय को ब्याज मिलता है।
  4. उद्यमी: यह वह व्यक्ति है जो जोखिम उठाता है और उत्पादन को सुगम बनाता है। उद्यमिता के बदले में उसे लाभ प्राप्त होता है।​​

​​🔰पाठ्य पुस्तक प्रश्नोत्तर

प्र० 1. अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याओं की विवेचना कीजिए। अथवा आर्थिक समस्या क्या है ? यह क्यों उत्पन्न होती है ?उत्तरः आर्थिक समस्या मूल रूप में साधनों की दुर्लभता के कारण होती है। दुर्लभता का अर्थ माँग की तुलना में पूर्ति का कम होना है। मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित है किन्तु उसके पास इन आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए साधन सीमित मात्रा में उपलब्ध है। अतः सीमित साधनों से वह अपनी सभी आवश्यकताओं को सन्तुष्टि नहीं कर सकता है। अतः प्रत्येक उपभोक्ता का यह प्रयास होता है कि वह कम साधनों से अधिक से अधिक सन्तुष्टि प्राप्त कर सके। इसलिए उसे यह चयन करना पड़ता है कि किन वस्तुओं का कितनी मात्रा में उपभोग करे। चयन की समस्या ही आर्थिक समस्या को जन्म देती है। चयन की समस्या को ही आर्थिक समस्या कहते है।जिस प्रकार व्यक्ति विशेष के पास साधन सीमित है और आवश्यकताएँ असीमित है, उसी प्रकार एक अर्थव्यस्था (देश) के पास भी साधन सीमित होते है और लक्ष्य या योजना असीमित होती है। साधनों की सीमितता के कारण चयन की समस्या उत्पन्न होती है। जैसे1. किस वस्तु का उत्पादन किया जाए ?2. उत्पादन के लिए किस तकनीक को उपनाया जाए ?3. उत्पादन किसके लिए किया जाए ?आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण1 .असीमित मानवीय आवश्यकताएँ - मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित है और उनको पुरे करने वाले साधन सीमित मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए उपभोक्ता सबसे पहले तीव्र आवश्यकताओं को पुरे करने का प्रयास करता है।2. सीमित साधन - आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करने के लिए मनुष्य के पास सीमित मात्रा में साधन उपलब्ध होते है। जिनसे वह अपनी सभी आवश्यकताओं की पुर्ति एक साथ नहीं कर सकता।3. साधनों के वैकल्पिक प्रयोग सम्भव होना - सीमित साधनों के वैकल्पिक प्रयोग हो सकते है। जैसे दूध का प्रयोग दही, मिठाई बनाने आदि में किया जाता है। असीमित आवश्यकताओं, सीमित साधनों एवं साधनों के वैकल्पिक प्रयोग होने के कारण चयन की समस्या उत्पन्न होती है। यही आर्थिक समस्या है।प्र० 2. अर्थव्यवस्था की उत्पादन संभावनाओं से आपका क्या अभिप्राय है? उत्तरः किसी अर्थव्यवस्था के संसाधनों का प्रयोग करके दो वस्तुओं के जिन भी संयोजनों का उत्पादन करना संभव है। वे उत्पादन संभावनाएँ कहलाती हैं। प्र० 3. सीमान्त उत्पादन संभावना क्या है? उत्तरः सीमान्त उत्पादन संभावना दो वस्तुओं के उन संयोगों को दर्शाती है, जिनका उत्पादन अर्थव्यवस्था के संसाधनों का पूर्ण रूप से उपयोग करने पर किया जाता है। यह एक वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त करने की अवसर लागत है। प्र० 4. अर्थव्यवस्था की विषय वस्तु की विवेचना कीजिए। उत्तरः अर्थशास्त्र एक विषय वस्तु है जो दुर्लभ संसाधनों के विवेकशील प्रयोग पर इस प्रकार केन्द्रित है, जिससे कि हमारा आर्थिक कल्याण अधिकतम हो। अर्थशास्त्र के विषय वस्तु को दो भागों में वर्गीकृत किया गया है।क) व्यष्टि अर्थशास्त्र-यह आर्थिक समस्याओं तथा आर्थिक मुद्दों का अध्ययन व्यक्तिगत उपभोक्ता या व्यक्तिगत उत्पादक या उनके छोटे से समूह को ध्यान में रखकर करता है। (ख) समष्टि अर्थशास्त्र-समष्टि अर्थशास्त्र संपूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्याओं और आर्थिक मुद्दों को अध्ययन करता है।प्र० 5. केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था तथा बाजार अर्थव्यवस्था के भेद को स्पष्ट कीजिए।उत्तरः केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था और बाजार अर्थव्यवस्था में मुख्य अंतर यह है कि एक में उत्पादन और वितरण पर सरकार का नियंत्रण होता है, जबकि दूसरे में यह बाजार बलों (आपूर्ति और मांग) द्वारा तय होता हैविशेषताएं: (केन्द्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था)
  • सामूहिक स्वामित्व: अधिकांश संपत्ति और उत्पादन के साधन सरकार के स्वामित्व में होते हैं.
  • योजना: सरकार उत्पादन के लक्ष्यों और आवंटन को निर्धारित करने के लिए विस्तृत योजनाएं बनाती
विशेषताएं: (बाजार अर्थव्यवस्था)
  • स्वतंत्र बाजार: कीमतें और उत्पादन मात्रा आपूर्ति और मांग के अनुसार तय होती हैं.
  • प्रतिस्पर्धा: विभिन्न कंपनियां एक ही बाजार में प्रतिस्पर्धा करती हैं.
  • निजी स्वामित्व: अधिकांश संपत्ति और उत्पादन के साधन निजी व्यक्तियों या कंपनियों के स्वामित्व में होते हैं.
प्र० 6. सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है?​उत्तरः सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण के अन्तर्गत हम यह अध्ययन करते हैं कि विभिन्न कार्यविधियाँ किस प्रकार कार्य करती हैं। उदाहरणतः जब हम कहते हैं कि कीमत के बढ़ने से माँग की मात्रा कम हो जाती है और कीमत कम होने से माँग की मात्रा बढ़ जाती है तो यह सकारात्मक आर्थिक विश्लेषण है।​प्र० 7. आदर्शक आर्थिक विश्लेषण से आपका क्या अभिप्राय है?उत्तरः आदर्शक आर्थिक विश्लेषण में हम यह समझाने का प्रयास करते हैं कि ये विधियाँ हमारे अनुकूल हैं भी या नहीं। उदाहरण के लिए जब हम कहते हैं कि सिगरेट और शराब की माँग कम करने के लिए उनके ऊपर कर की दरें बढ़ानी चाहिए तो यह आदर्शक विश्लेषण है।प्र० 8. व्यष्टि अर्थशास्त्र और समष्टि अर्थशास्त्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।​उत्तरः Picture

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🔰केस/स्रोत आधारित प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. निम्नलिखित अनुच्छेद (केस/स्रोत) को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा इसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-एक आदर्शक विज्ञान किसी विषय के अच्छे या बुरे परिणामों का मूल्यांकन करता है। यह मानवीय व्यवहार के लिए आदर्श प्रस्तुत करता है। इसका सम्बन्ध क्या होना चाहिए (What ought to be) से है और यह तथ्य की वांछनीयता एवं अवांछनीयता के बारे में बताता है। इसके अन्तर्गत हम संसाधन एवं उत्पादों के मध्य अपनायी गई तकनीक की अनुकूलता एवं प्रतिकूलता का अध्ययन करते हैं। हम यह जानना चाहते हैं कि कौन-सी आर्थिक क्रियाएँ समाज कल्याण में वृद्धि करती हैं, कौन-से संयोग समाज के लिए इष्टतम हैं तथा कौन-सी उत्पादन की तकनीक सामाजिक दृष्टि से वांछनीय है। अर्थशास्त्र को आदर्शक विज्ञान मानने वाले अर्थशास्त्रियों का मत है कि अर्थशास्त्रियों के दायित्व का निर्वाह केवल इतनी विवेचना से नहीं हो जाता कि विषय-वस्तु 'क्या है' अपितु उनका यह उत्तरदायित्व भी है कि वे बताएँ कि विषय-वस्तु 'क्या होनी चाहिए'।(i) आदर्शक विज्ञान का सम्बन्ध किससे है?(ii) आदर्शक विज्ञान में क्या अध्ययन करते हैं?(iii) आदर्शक विज्ञान क्या मूल्यांकन करता है?(iv) अर्थशास्त्रियों का क्या मत है?उत्तर-(i) आदर्शक विज्ञान का सम्बन्ध 'क्या होना चाहिए' से है।(ii) आदर्शक विज्ञान में हम संसाधन एवं उत्पादों के मध्य अपनायी गई तकनीक की अनुकूलता एवं प्रतिकूलता का अध्ययन करते हैं।(iii) एक आदर्शक विज्ञान किसी विषय के अच्छे या बुरे परिणामों का मूल्यांकन करता है।(iv) अर्थशास्त्र को आदर्शक विज्ञान मानने वाले अर्थशास्त्रियों का मत है कि अर्थशास्त्रियों के दायित्व का निर्वाह 'विषय वस्तु क्या होनी चाहिए' बताने पर ही पूर्ण होगा।प्रश्न 2. निम्नलिखित अनुच्छेद (केस/स्त्रोत) को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा इसके नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए- एक देश में आर्थिक क्रियाएँ (उत्पादन, उपभोग, निवेश एवं विनिमय की क्रियाएँ) उस देश की सरकार द्वारा नियन्त्रित एवं नियमित की जाती हैं परन्तु नियन्त्रण का स्तर विभिन्न राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न होता है। चीन, रूस एवं उत्तरी कोरिया में नियन्त्रण का स्तर बहुत ऊँचा है, ऐसी अर्थव्यवस्थाएँ जिनमें आर्थिक क्रियाओं के नियन्त्रण का स्तर (Degree of Control) बहुत ऊँचा होता है नियन्त्रित अर्थव्यवस्थाएँ (Controlled Economies) अथवा केन्द्रीय नियोजित अर्थव्यवस्थाएँ (Centrally Planned Economies) कहलाती हैं। दूसरा, कुछ ऐसी अर्थव्यवस्थाएँ हैं जिनमें नियन्त्रण का स्तर नाममात्र (बहुत कम) होता है। ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को स्वतन्त्र अर्थव्यवस्थाएँ (Free Economies) अथवा बाजार अर्थव्यवस्थाएँ (Market Economies) कहते हैं। यू०एस०ए० और यू०के० की अर्थव्यस्थाएँ इनका उदाहरण हैं। तीसरे, कुछ ऐसी अर्थव्यवस्थाएँ हैं जिनमें नियन्त्रण का स्तर साधारण (न तो बहुत अधिक और न ही बहुत कम) होता है। ऐसी अर्थव्यवस्थाओं को मिश्रित अर्थव्यवस्थाएँ (Mixed Economies) कहते हैं। यहाँ भारत एक प्रमुख उदाहरण है।(i) किसी देश में आर्थिक क्रियाओं का नियन्त्रण कौन करता है?(ii) नियन्त्रित अर्थव्यवस्था वाले देश कौन से हैं?(iii) स्वतन्त्र अर्थव्यवस्था क्या है?(iv) भारत की अर्थव्यवस्था कैसी है?उत्तर- (i) किसी देश में आर्थिक क्रियाओं का नियन्त्रण उस देश की सरकार करती है।(ii) चीन, रूस एवं उत्तरी कोरिया नियन्त्रित अर्थव्यवस्था वाले देश हैं।(iii) ऐसी अर्थव्यवस्थाएँ जिनमें नियन्त्रण का स्तर नाममात्र होता है,स्वतन्त्र अर्थव्यवस्थाएँ कहलाती हैं।(iv) भारत की अर्थव्यवस्था मिश्रित अर्थव्यवस्था है। व्यष्टि तथा समष्टि अर्थशास्त्र में क्या अन्तर है? Watch Video 🔺

ASSESSMENT (मूल्यांकन)

सभी प्रश्न करना अनिवार्य है। प्रश्न बहुविकल्पीय प्रकार के होगें।

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Tag » Arthashastra Ko Kya Hai